नमस्ते 🙏
मेरा नाम हरिन्द्र यादव है। मैं उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के एक छोटे से गाँव चरौवा का निवासी हूँ।
गाँव की मिट्टी में पला-बढ़ा, संघर्षों में पला और सपनों को साकार करने की राह पर निकल पड़ा।
गरीबी, पारिवारिक संघर्ष और जीवन की कठिनाइयों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया —
इन्हीं अनुभवों ने मुझे लिखने की प्रेरणा दी।
मैंने अपने जीवन के सफर को शब्दों में ढालकर किताबों के रूप में पेश किया, ताकि जो राह मैंने तय की,
वो दूसरों के लिए प्रेरणा बने।
मेरी लिखी किताबें जैसे –
“माटी से मंज़िल तक” और “मैं और मेरा सफर” —
मेरे जीवन की सच्ची कहानियाँ हैं, जिनमें संघर्ष, उम्मीद, मेहनत और आत्मविश्वास की झलक है।
इस ब्लॉग (harindrayadavstory.blogspot.com) के ज़रिए मेरा मक़सद है कि
मैं अपने विचार, अनुभव और प्रेरणादायक कहानियाँ आप तक पहुँचाऊँ —
ताकि हर व्यक्ति अपने भीतर की ताकत को पहचान सके और कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ सके।
मेरा विश्वास है कि अगर इंसान ठान ले, तो हालात चाहे जैसे भी हों —
मंज़िल ज़रूर मिलती है।
आपका साथी,
हरिन्द्र यादव
✉️ Contact: harindrayadavstory@gmail.com
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